वित्त मंत्रालय द्वारा पेश की रिपोर्ट से हुआ खुलासा
India’s Foreign Debt (आज समाज), नई दिल्ली : विश्व के सभी प्रमुख देश और उनकी अर्थव्यवस्था जहां अलग-अलग चुनौतियों से जूझ रही है। वहीं हमारा देश भी वित्तीय मोर्चे पर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक तरफ जहां अलग-अलग सर्वे भारत को सबसे ज्यादा उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में घोषित कर चुकी है और यह संभावना जताई जा रही है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2025-26 में तेजी से विकास करेगी। वहीं देश के सामने जो प्रमुख चुनौतियां हैं उनमें से एक है देश पर बढ़ता विदेशी ऋण।
19.1 रहा जीडीपी और विदेशी ऋण का अनुपात
तिमाही विदेशी ऋण रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2024 के अंत में विदेशी ऋण में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। पिछले साल इसी समय भारत का विदेशी लोन 712.7 अरब डॉलर था। दिसंबर 2024 के अंत में विदेशी ऋण और जीडीपी का अनुपात 19.1 प्रतिशित रहा। सितंबर में यह 19 फीसदी था। वित्त मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार के बकाया बाहरी ऋण में कमी आई है।
हालांकि, गैर-सरकारी क्षेत्र का बकाया ऋण दिसंबर 2024 के अंत में सितंबर 2024 के अंत के स्तर से अधिक हो गया। बकाया ऋण से जुड़ी इस रिपोर्ट के मुताबिक गैर-वित्तीय निगमों के बकाया ऋण का हिस्सा 36.5 प्रतिशत था। इसके बाद 27.8 फीसदी लोन, जमा स्वीकार करने वाले निगमों (केंद्री. बैंक छोड़कर) का है। केंद्र सरकार का हिस्सा 22.1 फीसदी है, जबकि अन्य वित्तीय निगमों का हिस्सा 8.7 फीसदी था।
लोन के अलग-अलग हिस्से
इसी रिपोर्ट के मुताबिक बाहरी कर्ज का सबसे बड़ा कारण लिया गया लोन है। 33.6 फीसदी लोन के अलावा 23.1 फीसदी मुद्रा और जमा, व्यापार ऋण और एडवांस 18.8 फीसदी है। लोन सिक्योरिटी 16.8 फीसदी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऋण सेवा (मूलधन चुकौती प्लस ब्याज भुगतान) दिसंबर 2024 के अंत तक 6.6 फीसदी था। यह सितंबर 2024 के अंत में चालू प्राप्तियों का 6.7 प्रतिशत था।
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