Pradosh Vrat March-2025, आज समाज डेस्क: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस महीने का आखिरी प्रदोष व्रत कल यानी 26 मार्च रात से 27 मार्च शाम तक पड़ेगा। प्रदोष व्रत के दिन पूजा का समय प्रदोष काल में होता है, जो सूर्यास्त के बाद का समय होता है। महादेव की कृपा के लिए पूरे भक्ति और श्रद्धा भाव से व्रत करें।

यह भी पढ़ें : God Hanuman: हनुमान जी को समर्पित है राजस्थान का मशहूर मेहंदीपुर बालाजी मंदिर

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ व समापन

26 मार्च 2025, देर रात 1:42 मिनट पर चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी। वहीं इसका समापन 27 मार्च की रात 11 बजकर 3 मिनट पर होगा। प्रदोष व्रत में विशेष रूप से भगवान शिव का पूजन व शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। इसके अलावा शिवलिंग पर बेलपत्र व आक के फूल चढ़ाए जाते हैं। भक्क्तों को शिव मंत्रों का जाप भी जरूरी करना चाहिए।

यह भी पढ़ें : Hanuman Chalisa: विधि विधान से पाठ करने से होती है बजरंगबली की अपार कृपा

यह है पूजा का शुभ मुहूर्त

ज्योतिष के मुताबिक प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 27 मार्च शाम 6:35 मिनट से रात 8:57 मिनट तक रहेगा। इस दौरान पूजा करना अत्यंत फलदायी व शुभ माना जाता है। साथ इस समय भोलेशंकर की पूजा और ध्यान विशेष रूप से प्रभावशाली होती है।

इस तरह करें पूजा

भक्तों को सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके प्रदोष व्रत का संकल्प लें। पूजा के स्थान पर शिवलिंग की स्थापना करें। फिर शिवलिंग के ऊपर आक, मदार व गुड़हल आदि के फूलों के अलावा जल और बेलपत्र चढ़ाएं।

व्रत करने वाले रखें इन बातों का ध्यान

प्रदोष व्रत के दिन किसी पर गुस्सा या किसी के प्रति द्वेष की भावना न रखें। नकारात्मक सोच को मन से दूर रखें। इस दिन तामसिक भोजन न करें। मादक पदार्थों व मांसाहार के सेवन से भी दूर रहना चाहिए।
व्रत के दौरान झूठ बोलने से बचें। किसी का अपमान अथवा अनादर न करें। व्रती को दिनभर भगवान महादेव का ध्यान व स्मरण करना चाहिए।

पूजा करते समय करें इन मंत्रों का जाप

पूरे शिव परिवार की पूजा करें, जिसमें भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी की पूजा भी शामिल हो। पूजा करते समय ॐ नम: शिवाय और ॐ त्र्यम्बकं यजामहे जैसे शिव के मंत्रों का जाप करें। पूजा के समापन पर भगवान शिव की आरती करनी चाहिए। उन्हें प्रिय भोग अर्पित करें। पूजा करने के बाद, प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें अथवा कथा सुनें। प्रदोष व्रत के अगले दिन भक्त व्रत का पारण करें।

यह भी पढ़ें : Chaitra Amavasya: पूर्वजों को समर्पित है अमावस्या, करें दान-पुण्य, बरसेगी कृपा