PM Modi New Cabinet Team, अजीत मेंदोला, (आज समाज), नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीसरी पारी में पहले मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है।सूत्रों की माने तो प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा शुरू करवा दी है। पिछले दिनों मंत्रियों की बैठक में लंबित मामलों पर जिस तरह सवाल जवाब किए उससे यही संकेत मिल रहे है कि पीएम अपनी टीम में बदलाव करेंगे।

इस महीने पूरा हो जाएगा नए अध्यक्ष का चुनाव

सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को काम को लेकर हिदायत भी दे दी है। ऐसे संकेत हैं कि बीजेपी के नए अध्यक्ष के चुनाव पूरे होने के बाद प्रधानमंत्री अपनी नई टीम को लेकर काम शुरू कर सकते हैं। नए अध्यक्ष का चुनाव इस माह में पूरा हो जाएगा। अगले माह तक बीजेपी की नई टीम भी सामने आ जाएगी। इसके बाद सरकार की बारी के आसार हैं।

तीसरी पारी का अगले महीने एक साल पूरा

प्रधानमंत्री मोदी की तीसरी पारी का अगले महीने एक साल भी पूरा हो जाएगा। उन्होंने पिछले साल 9 जून को शपथ ली थी। उस समय उन्होंने अपनी दूसरी पारी के मंत्रिमंडल में कोई विशेष बदलाव नहीं किया था। तीसरी पारी में अधिकाशं उन्हीं चेहरों को पहले वाले मंत्रालयों में ही बनाए रखा जो पहले से थे। स्पीकर जैसे पद में भी कोई बदलाव नहीं किया।

पहली बार नए सहयोगियों की मदद से बहुमत हासिल किया

पहली बार नए सहयोगियों की मदद से बहुमत हासिल किया था,इसलिए पीएम ने बदलाव पर जोर नहीं दिया। जबकि इससे पूर्व दो कार्यकाल में बीजेपी ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया था। जिसके चलते सरकार चलाने के लिए दूसरे दलों के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ी थी। हालांकि राजग के साथ जो दल थे उन्हें सरकार में जगह दे सरकार चलाई थी। लेकिन 2024 के आम चुनाव में विपक्ष ने संविधान खतरे में और आरक्षण समाप्त हो जाएगा, का झूठा प्रचार कर बीजेपी को बहुमत से रोक दिया था। लेकिन राजग ने बहुमत हासिल किया।

सरकार और सहयोगियों को और मजबूत करने पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह नया अनुभव था। पहली बार मोदी ऐसी सरकार चला रहे थे जो सहयोगियों के सहारे चल रही थी। हालांकि मोदी ने सरकार के गठन के समय जिस तरह फैसले किए, लगा ही नहीं कोई दबाव है। प्रधानमंत्री मोदी ने बिना दबाव के मंत्रिमंडल अपने हिसाब से गठित किया। लेकिन प्रयोग करने से बचे। जो व्यवस्था जैसी थी वैसे ही बनी रहने दी। प्रधानमंत्री मोदी ने ज्यादा बदलाव के बदले पहले सरकार और सहयोगियों को और मजबूत करने पर जोर दिया। सरकार के गठन के बाद विपक्ष जिस तरह का व्यवहार कर रहा था उस पर अंकुश लगाना पहली चुनौती थी।

संघ से संबंध सुधारे फिर तीन राज्यों मेें चुनाव लड़ा

प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले संघ के साथ संबंध सुधारे फिर हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे तीनों राज्यों को प्रतिष्ठा का बना चुनाव लड़ा। क्योंकि इन तीनों राज्यों में बीजेपी को कमजोर माना जा रहा था। आम चुनाव में महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी को झटका भी लगा था। चुनाव पूर्व हालात ठीक नहीं दिख रहे थे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में तीनों राज्यों में बीजेपी ने शानदार जीत हासिल कर विपक्ष को पूरी तरह से बैकफुट पर कर दिया। विपक्ष के तेवर पूरी तरह से ढीले पड़ गए।

वक्फ बोर्ड बिल पारित करवाकर ताकत का अहसास कराया

प्रधानमंत्री मोदी ने वक्फ बोर्ड बिल को दोनों सदनों में पेश कर भारी मतों से पारित करवा अपनी ताकत का अहसास कर बता दिया कि गठबंधन की सरकार में कड़े फैसले किए जा सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने तीन राज्यों में मिली जीत के बाद अपनी पूरी रणनीति ही बदल दी। जानकार भी मानते हैं कि मोदी फिर से पहले वाले रूप में लौट आए हैं। तीन राज्यों की जीत ने स्थिति फिर से पलट दी। सहयोगी जेडीयू या टीडीपी की समझ में आ गया था कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई। प्रधानमंत्री मोदी ने आम बजट से पहले सहयोगियों को साधा और उसके बाद वक्फ जैसा बिल बजट सत्र में पारित करवा बता दिया कि अब वह चौंकाने वाले बड़े फैसले करेंगे। इसलिए बजट सत्र के दौरान हुई बैठक में मंत्रियों को बहुत कुछ संदेश दे दिए।

लंबित मामले और उपलब्धियां प्रमुख एजेंडे में

प्रधानमंत्री अब जब भी मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे तो लंबित मामले और उपलब्धियां प्रमुख एजेंडे में रहेगा। ऐसे संकेत हैं कि प्रधानमंत्री मोदी अब जब भी मई जून में अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करेंगे वह चौंकाने वाला ही होगा। प्रधानमंत्री ने अपनी दूसरी पारी में पहले मंत्रिमंडल विस्तार में कई दिग्गजों की छुट्टी कर चौंकाया था। कुछ इस तरह का इस बार भी हो सकता है। मानसून सत्र से पूर्व नई टीम के गठन के आसार बताए जा रहे हैं।

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