क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता इंसान की जगह ले सकती है? विषय पर ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आयोजित

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Panipat News/Dr.MKK Arya Model School
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आज समाज डिजिटल, पानीपत :
पानीपत। बुधवार को डॉ.एमकेके आर्य मॉडल स्कूल में कक्षा बारहवीं ए के विद्यार्थियों द्वारा एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका विषय क्या इंसानों को एआई के विकास का पीछा करना चाहिए? क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता इंसान की जगह ले सकती है? था। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन यशपाल ने किया। कशिश, गरिमा, मयंक और रिद्धिमा ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम का आरंभ गायत्री मंत्र उच्चारण द्वारा किया गया। रचित  ने सुबह के ताज़ा समाचारों का वाचन किया।

कृत्रिम बुद्धिमता युक्त मशीने इंसान को पछाड़ देंगी?

इश्मीत कौर, अंकिता, कार्तिक शर्मा, चशिता, वंश धमीजा और कार्तिक मिश्रा आदि ने अपने-अपने भाषण में बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। आर्टिफिशियल का अर्थ है बनावटी (कृत्रिम) तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता। इसके ज़रिये कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है, जिसे तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास किया जाता है, जिसके आधार पर मानव मस्तिष्क काम करता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तात्पर्य मशीनी बुद्धिमत्ता से है। कृत्रिम बुद्धिमता के भविष्य को लेकर एक जरूरी सवाल यह है कि क्या आने वाले वक्त में कृत्रिम बुद्धिमता युक्त मशीने इंसान को पछाड़ देंगी? आज एआई के जरिए मशीनों को परिस्थिति के अनुसार स्वयं निर्णय लेने की तकनीक विकसित की जा रही है। तकनीकी विशेषज्ञों की माने तो दुनिया में एक ऐसा वक्त आएगा जब किसी मशीन को इंसानों से कमांड लेने की जरूरत नहीं होगी

ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी प्रस्तुत की

कक्षा बारह के विद्यार्थी गुंजन, अरमान, खुशी  ने अपनी -अपनी कविताओं के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता को वर्णित  किया। कक्षा के छात्रों द्वारा विषय से संबंधित लघु नाटिका की प्रस्तुत की गई। विद्यार्थी आनंद और अनमोल ने ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी प्रस्तुत की, जिसमें बारहवीं के सभी वर्गों के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य मधुप परासर  और शैक्षिक सलाहकार मंजू सेतिया ने बच्चों  के इस कार्यक्रम की सराहना की। विद्यालय की भाषा व गतिविधि प्रभारी मीरा मरवाह ने कहा कि ज़ाहिर है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीक का सकारात्मक और नकारात्मक पक्षों के गहन विश्लेषण की जरूरत है। पुराणों में कहा गया है- ‘अति सर्वत्र वर्जयेत्’ अर्थात् अति करने से हमेशा बचना चाहिए।

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