(Mahendragarh News) महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ में उत्कल दिवस (ओडिशा डे) धूमधाम व उत्साह के साथ मनाया गया। विश्वविद्यालय में अध्ययनरत ओडिशा प्रदेश के विद्यार्थियों ने यह पर्व पारम्परिक रीति-रिवाज के साथ मनाया। कार्यक्रम में मुख्य संरक्षक के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार, विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री तनम्य दास व मुख्य वक्ता के रूप में श्री जगन्ननाथ संस्कृति सुरक्षा अभियान के सचिव श्री अजय राउत की गरिमामयी उपस्थिति रही।

विश्वविद्यालय के प्रो. मूल चंद शर्मा सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्जवलन के साथ हुई। इसके पश्चात ओडिशा राज्य के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. देवेंद्र प्रधान को सभागार में उपस्थित सहभागियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद ओडिशा के राज्य गीत ’वंदे उत्कल जननी’ की मधुर प्रस्तुति हुई। प्रो. टंकेशवर कुमार ने सभी को उत्कल दिवस की बधाई देते हुए कहा कि यह हम सभी के लिए खुशी व गर्व की बात है कि हम विश्वविद्यालय में प्रति वर्ष उत्कल दिवस का आयोजन करते हैं। कुलपति ने कहा कि यह आयोजन विद्यार्थियों, शिक्षकों व शोधार्थियों को एक-दूसरे राज्यों की कला, संस्कृति खानपान व परम्पराओं से रुबरु होने का अवसर प्रदान करता है।

ओडिशा की समृद्ध परंपराएं इतिहास, कला और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम : तनम्य दास

आयोजन में उपस्थित विशिष्ट अतिथि श्री तनम्य दास ने उत्कल दिवस की बधाई देते हुए इस दिवस विशेष के महत्त्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि ओडिशा की समृद्ध परंपराएं इतिहास, कला और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम हैं। उन्होंने इस आयोजन के लिए विद्यार्थियों को बधाई दी। इसी क्रम में मुख्य वक्ता श्री अजय राउत ने अपने संबोधन में उत्कल दिवस के अवसर पर ओडिशा की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक विरासत के 90 वर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि इस कालखंड में किस तरह से इस प्रदेश ने देश की प्र्रगति, विकास व सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि उत्कल दिवस जैसे आयोजन हमारी साझा जड़ों और परंपराओं की याद दिलाते हैं।

इससे पूर्व में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अलेखा सचिदानंद नायक ने एक वृत्तचित्र के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसमें ओडिशा के वर्तमान परिदृश्यों को उसके प्राचीन वैभव के साथ दर्शाया गया है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने ओड़िशा के पारम्परिक नृत्यों व गीत की प्रस्तुतियों से आयोजन की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का संचालन संदीप, मुस्कान, अलेख और ईशा वैशाखी ने किया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अलेख सचिदानंद ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के शोधार्थी नारायण चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की प्रथम महिला प्रो. सुनीता श्रीवास्तव, प्रो. रंजन कुमार साहू, डॉ. नीरज कर्ण सिंह, डॉ. अभिरंजन कुमार व डॉ. मुकेश उपाध्याय सहित विभिन्न पीठों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी व शोधार्थी उपस्थित रहे।

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