अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने की घोषणा 2025 में जापान को पीछे छोड़ देगा भारत
Growth in Indian Economy (आज समाज), बिजनेस डेस्क : विश्व के बड़े देश जहां एक तरफ अमेरिका की टैरिफ नीति से पैदा होने वाले संकट से निपटने के प्रति चिंतित हैं वहीं भारत लगातार विकास की तरफ अग्रसर है। हालांकि अमेरिका दो अप्रैल से भारत के साथ भी पारस्परिक टैरिफ नीति के अनुसार व्यापार करने की घोषणा कर चुका है लेकिन भारत ने इसके लिए अपनी जवाबी योजना तैयार कर दी है।
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी घोषणा की है। आईएमएफ के अनुसार भारत वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही तक जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने यह दावा भारत की लगातार मजबूत होती जीडीपी के चलते किया है।
यह है भारत के विकास का बड़ा पहलू
देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पिछले दशक में दोगुने से भी अधिक हो गया है, जो 2015 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में अनुमानत: 4.3 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा। आईएमएफ के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत, जो वर्तमान में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जापान के करीब पहुंच रहा है, जिसका जीडीपी 4.4 ट्रिलियन डॉलर है। पिछले दस सालों में भारत की अर्थव्यवस्था में 105% की वृद्धि हुई है, जबकि जापान की जीडीपी स्थिर बनी हुई है।
यदि भारत इसी विकास पथ पर आगे बढ़ता रहा, तो वह 2027 की दूसरी तिमाही तक 4.9 ट्रिलियन डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद के साथ भार दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी को भी पीछे छोड़ सकता है।
पाकिस्तान के लिए की आर्थिक मदद की घोषणा
पिछले काफी समय से भारत का पड़ौसी मुल्क पाकिस्तान आर्थिक मोर्चे पर तंगहाली में है। उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमराई हुई है और विदेशों से पर्याप्त मदद न मिलने से परेशानी और भी ज्यादा बढ़ रही थी। इसी बीच पाकिस्तान के लिए राहत की खबर यह है कि अंतरराष्टÑीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने उसे ऋण के रूप में बड़ी रकम देने पर अपनी सहमति जता दी है।
इसके अनुसार जल्द ही पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 1.3 अरब डॉलर का ऋण मिल जाएगा। इसके साथ ही, पहले से स्वीकृत 7 अरब डॉलर के ऋण की पहली समीक्षा पर स्टाफ स्तर का समझौता भी हो गया है। नए समझौते में जलवायु के लचीलेपन को तरजीह दी गई है। यह समझौता 28 महीने से अधिक समय तक चलेगा।
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