Income tax return : नया वित्तीय वर्ष जो की 1 अप्रैल से शुरू हो चूका है इसके साथ ही वित्तीय संसाधनों से सम्भंदित सभी नियमो में बदलाव भी हो जाता है। जिसका असर सभी व्यक्तियों पर पड़ता है।
नए वित्तीय वर्ष के साथ ही आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नई कर व्यवस्था को डिफॉल्ट मोड में लागू कर दिया गया है। जो भी व्यक्ति आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करते है उन्हें डिफॉल्ट मोड में नई आयकर व्यवस्था देखने को मिलेगी।
करदाताओं के पास कर व्यवस्था चुनने का विकल्प
अगर किसी करदाता को पुरानी आयकर व्यवस्था के आधार पर आयकर देना है तो उसे इसमें बदलाव करना होगा और पुरानी योजना के तहत आयकर देना शुरू करना होगा। इसमें करदाताओं के पास कर व्यवस्था चुनने का विकल्प होगा।
जिन लोगों को लगता है कि पुराना स्लैब उनके लिए फायदेमंद है, वे पुराने स्लैब सिस्टम का इस्तेमाल कर सकते हैं। सीए आशीष रोहतगी और सीए रश्मि गुप्ता ने बताया कि बिना किसी व्यावसायिक आय वाले पात्र व्यक्तियों के पास प्रत्येक वर्ष के लिए व्यवस्था चुनने का विकल्प होगा। इसलिए वे एक वित्तीय वर्ष में पुरानी कर व्यवस्था और दूसरे वर्ष में नई कर व्यवस्था चुन सकते हैं।
नई व्यवस्था के तहत दाखिल कर सकते हैं आईटीआर उन्होंने कहा कि अगर किसी नियोक्ता ने अपने कर्मचारी के लिए पुरानी व्यवस्था के तहत टीडीएस काटा है, तो कर्मचारी चाहे तो नई व्यवस्था के तहत आईटीआर दाखिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल से अन्य चीजें भी बदल गई हैं।
1 अप्रैल से बदलाव
1. इसके तहत बैंकिंग धोखाधड़ी को रोकने के लिए नए चेक सत्यापन नियम लागू किए गए हैं। इसके अलावा पांच हजार रुपये से अधिक के चेक भुगतान के लिए अब चेक नंबर, तारीख, लाभार्थी का नाम और राशि का सत्यापन करना होगा।
2. साथ ही रुपे डेबिट कार्ड में नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। इससे एयरपोर्ट लाउंज तक पहुंच, बीमा आदि जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। इसके अलावा एटीएम से मुफ्त लेनदेन की सीमा अब सिर्फ तीन बार होगी।
3. न्यूनतम बैलेंस सीमा को लेकर भी नियम लागू किए जा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए टीडीएस कटौती की अधिकतम सीमा भी बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है। यह राशि पहले 50 हजार रुपये थी।
नई कर व्यवस्था
12 लाख रुपये तक कोई कर देय नहीं होगा। साथ ही अपडेटेड टैक्स रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा 24 महीने से बढ़कर 48 महीने हो जाएगी। इसके साथ ही मकान मालिकों के लिए किराए की आय पर टीडीएस कटौती की सीमा बढ़ाकर छह लाख रुपये सालाना कर दी गई है। पहले यह दो लाख चालीस हजार रुपये सालाना थी। 10 लाख रुपये से अधिक के विदेशी लेनदेन पर टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) लागू होगा। पहले यह सीमा सात लाख रुपये थी।
दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ की सीमा बढ़ेगी
सीए आशीष रोहतगी और सीए रश्मि गुप्ता ने बताया कि आयकर संशोधन के अनुसार एक अप्रैल से लाभांश आय पर टीडीएस कटौती अब 10 हजार रुपये सालाना होगी। पहले यह पांच हजार रुपये थी।
इसके साथ ही पूंजीगत लाभ में बदलाव करते हुए दीर्घावधि पूंजीगत लाभ छूट की सीमा बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी गई है। पार्टनरशिप फर्मों को अब अपने साझेदारों को मिलने वाले वेतन और पूंजी प्रवाह पर अनिवार्य रूप से टीडीएस काटना होगा। पहले यह लागू नहीं था।
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