GST Fraud Alert : सरकार द्वारा वस्तु एवं सेवा कर के अंतर्गत एक जरुरी सूचना दी गयी है सरकार अब जीएसटी की चोरी पकड़ने के लिए एक शक्तिशाली ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ तंत्र लागू करने जा रही है। हालांकि अभी सरकार द्वारा कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। सरकार द्वारा उठाये गए इस कदम से राजस्व में वृद्धि होगी और उन लोगो के खिलाफ करवाई की जाएगी जो कर की चोरी करते है। इस सिस्टम को अप्रैल में शुरू करने की तैयारी है। ।

ट्रैक एंड ट्रेस तंत्र का इस्तेमाल कुछ खास तरह के सामानों के लिए

जीएसटी विशेषज्ञ और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रवीण शर्मा का कहना है कि ट्रैक एंड ट्रेस तंत्र का इस्तेमाल कुछ खास तरह के सामानों के लिए किया जाएगा।

माना जा रहा है कि यह प्रणाली एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) सेक्टर, तंबाकू से जुड़े उत्पादों के साथ-साथ दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों जैसी वस्तुओं की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर लागू होगी। अक्सर देखा जाता है कि इस तरह के सामानों की बिक्री वास्तविक आपूर्ति से कम दिखाई जाती है, जिससे जीएसटी चोरी की संभावना रहती है। इस मैकेनिज्म के तहत फैक्ट्री से निकलने से लेकर रिटेल शॉप तक पहुंचने तक की पूरी जानकारी सरकार के पास होगी।

सामानों की आपूर्ति की जानकारी में हेराफेरी करना संभव नहीं

जीएसटी विभाग इस सिस्टम के तहत आने वाले सामानों के निर्माताओं को अपना खास सॉफ्टवेयर देगा। निर्माताओं को चुनिंदा सामानों के लिए एक खास कोड बनाना होगा। यह कोड सॉफ्टवेयर से जुड़ा होगा, जिससे किसी भी तरह से सामानों की आपूर्ति की जानकारी में हेराफेरी करना संभव नहीं होगा। इससे एक मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित होगी, जिससे जीएसटी चोरी की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।

नियमों का उल्लंघन करने पर ₹1 लाख का जुर्माना

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ट्रैक एंड ट्रेस मैकेनिज्म के तहत आने वाले सामानों के निर्माता इसे नहीं अपनाते हैं, तो उन्हें कम से कम ₹1 लाख का जुर्माना देना पड़ सकता है। यह नियम निर्माताओं के लिए इस नई व्यवस्था को गंभीरता से लेने और इसे लागू करने के लिए एक मजबूत प्रोत्साहन होगा। सरकार अब जीएसटी चोरी के प्रति और सख्त रवैया अपनाने के मूड में है।

जीएसटी नियमों में अन्य बदलाव

  • ई-इनवॉइस

सालाना ₹10 करोड़ से अधिक का कारोबार करने वाले व्यापारियों को अब ई-इनवॉइस जारी होने के 30 दिनों के भीतर इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल (आईआरपी) पर इसकी जानकारी देनी होगी। पहले ऐसी जानकारी देने के लिए कोई समय सीमा नहीं थी। यह बदलाव व्यवसायों को समय पर और सटीक जानकारी देने के लिए बाध्य करेगा।

  • पहचान सत्यापन

1 अप्रैल से जीएसटी पोर्टल के उपयोगकर्ताओं को मजबूत पहचान के लिए अपनी कई पहचानों के बारे में जानकारी देनी होगी। पुराने उपयोगकर्ताओं को भी अपनी पहचान अपडेट करनी होगी।

इसके अलावा, अगर किसी व्यापारी के पास एक ही पैन नंबर पर अलग-अलग राज्यों में कई जीएसटी पंजीकरण हैं, तो ऐसे व्यापारी के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के वितरण के लिए इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर (आईएसडी) के रूप में पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। इस कदम से फर्जी पंजीकरण और आईटीसी के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी।

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