Earthquake Jolts Afghanistan,(आज समाज), काबुल: अफ़गानिस्तान में आज 5.2 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने यह जानकारी दी। एनसीएस के बयान के मुताबिक एक भूकंप का केंद्र 180 किमी की गहराई पर था। यह भूकंप दिन में पहले आए 4.6 तीव्रता वाले एक अन्य भूकंप का आफ्टरशॉक था। इससे पहले अफ़गानिस्तान में 23 मार्च को 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था।
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21 व 23 मार्च को भी आया था भूकंप
इससे पहले अफ़गानिस्तान में 23 मार्च को 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था। एनसीएस के अनुसार, 21 मार्च यानि पिछले सप्ताह शुक्रवार को अफगानिस्तान में 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था। एनसीएस के आंकड़ों के अनुसार, यह भूकंप 160 किलोमीटर की गहराई पर आया था।
प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील : UNOCHA
मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOCHA) के अनुसार, अफ़गानिस्तान मौसमी बाढ़, भूस्खलन और भूकंप सहित प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। UNOCHA ने कहा कि अफ़गानिस्तान में लगातार आने वाले भूकंप कमज़ोर समुदायों को नुकसान पहुंचाते हैं, जो पहले से ही दशकों के संघर्ष और अविकसितता से जूझ रहे हैं और कई झटकों से निपटने के लिए उनके पास बहुत कम लचीलापन है।
शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास : रेड क्रॉस
रेड क्रॉस के अनुसार, अफ़गानिस्तान में शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास रहा है और हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है जहाँ हर साल भूकंप आते हैं। अफ़गानिस्तान भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच कई फॉल्ट लाइनों पर स्थित है, जिसमें एक फॉल्ट लाइन सीधे हेरात से भी गुज़रती है। जब भूकंप आते हैं, तो उनका परिमाण महत्वपूर्ण होता है, लेकिन उनकी गहराई भी महत्वपूर्ण होती है, उथले भूकंप पृथ्वी में गहराई से आने वाले भूकंपों की तुलना में अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। दुर्भाग्य से अफ़गानिस्तान इन उथले भूकंपों के लिए प्रवण है क्योंकि इस क्षेत्र की टेक्टोनिक प्लेटें अक्सर सीधे टकराने के बजाय एक दूसरे से खिसक जाती हैं।
इस वजह से आते हैं भूकंप
भूकंप आने का मुख्य कारण धरती के अंदर मौजूद प्लेटों का आपस में टकराना है। धरती में 7 प्लेटें हैं, जो हमेशा घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेटें अधिक टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेटों के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेटें टूटने लगती हैं और नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं। ऐसी स्थिति में डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
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रिक्टर स्केल से की जाती है जांच
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से की जाती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहते हैं। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर इसके केंद्र से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का पता लगता है।
एपीसेंटर उसे कहते हैं जहां भूकंप का कंपन अधिक होता है
भूकंप का केंद्र यानी एपीसेंटर उस स्थान को कहते हैं जिसके बिलकुल नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। उस स्थान पर भूकंप का कंपन अधिक होता है। कंपन की आवृत्ति जैसे-जैसे दूर होती जाती है, इसका प्रभाव घटता जाता है। फिर भी अगर रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है।
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