जीवन प्रकृति का अमूल्य उपहार है। लेकिन इसमें तमाम तरह की विसंगतियां और व्याधियां भी हैं। जिंदगी में इस तरह के कई बाधाएँ आती हैं जब इंसान टूट जाता है। जीवन के साथ बीमारियाँ भी जुड़ी हैं, जिसकी वजह से इंसान परेशान हो उठता है। कभी- कभी स्वस्थ्य और भला व्यक्ति भी उस तरह की व्याधियों की चपेट में आकर बिखर जाता है। भारत में सुगर, कैंसर, एड्स जैसी बीमारियाँ हैं। साल भर से कोरोना संक्रमण दुनिया को परेशान किए है।
अब तक लाखों लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है और संक्रमण की संख्या करोड़ में पहुँच गई है। एड्स यानी ह्यूमन इम्यूनो डिफिसिएंसी वायरस संक्षिप्त में हम (एचआईवी) कहते हैं। एड्स संक्रमण के बाद की स्थिति है। दुनिया में 38 मिलियन लोग एचआईवी संक्रमित हैं जिनमें से 25.4 मिलियन से अधिक लोग एआरटी की दवा ले रहे हैं। अब तक एचआईवी (एड्स) से 32.7 मिलियन लोगों की मृत्यु हो चुकी है। प्रतिवर्ष दुनिया में 1.7 मिलियन एचआईवी का नया संक्रमण होता है। दुनिया में कुल संक्रमित मरीजों में 18 मिलियन बच्चे हैं।
भारत में कुल एचआईवी संक्रमित मरीजों की संख्या 2.1 मिलियन है, जिसमें से 880000 महिलाएं हैं तथा बच्चों की संख्या 145000 के आसपास है। देश में प्रतिवर्ष 75000 नए मरीज संक्रमित होते हैं। दुनिया के लिए एड्स भयंकर चुनौती बन गया है।
लेकिन अब रिसर्च की वजह से आधुनिक दवाएँ उपलब्ध होने से संक्रमित व्यक्ति अपना जीवन अच्छे तरीके से जी सकता है। नियमित दवाओं के सेवन से दैनिक दिनचर्या बेहतर करने से सबकुछ अच्छा हो सकता है, सिर्फ अपनी सोच में बदलाव की जरूरत है। भारत में 86 फीसदी एचआईवी का संक्रमण असुरक्षित यौन सम्पर्क से होता है। संक्रमित मां से 3.6 फीसदी बच्चों में फैलता है। एचआईवी संक्रमित रक्त से सिर्फ दो फीसदी लोगों में एचआईबी का संक्रमण फैलता है जबकि 6 फीसदी दूसरे माध्यमों से फैलता है।
स्थिति साफ है कि आज भी एचआईवी का सबसे सुरक्षित वाहक असुरक्षित यौन संपर्क है। साल 2017 में कुल 69000 मरीजों की मृत्यु एड्स की वजह हुई थी। उत्तर प्रदेश में एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की संख्या तकरीब डेढ़ लाख है। प्रतिवर्ष उत्तर प्रदेश में लगभग 9000 से अधिक लोग संक्रमित होते हैं जबकि 5000 के आसपास लोगों की मृत्यु होती है। इस तरह हमें हरहाल में असुरक्षित यौन संपर्क से बचना होगा।
क्योंकि सबसे अधिक एड्स का संक्रमण इसी से फैल रहा है, हालाँकि अब लोगों में जागरूकता आ गई है लोग इन बातों को गम्भीरता से लेने लगे हैं, लेकिन फिर भी हालात उतने सुधरे नहीँ हैं। दुनिया में एचआईवी से पीड़ित होने वालों में सबसे अधिक संख्या किशोरों की है। यह संख्या 20 लाख से ऊपर है। दो साल पूर्व यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि वर्ष 2000 से अब तक एड्स से पीड़ित होने के मामलों में तीन गुना इजाफा हुआ है। एड्स से पीड़ित दस लाख से अधिक किशोर सिर्फ छह देशों में रह रहे हैं और भारत उनमें एक है। भारत के मशहूर चिकित्सा संस्थान काशी हिन्दू विश्वविध्यालय स्थित एआरटी सेंटर के वरिष्ठ परामर्शदाता डा.मनोज तिवारी ने बताया कि भारत में बढ़ती महामारी पर नियंत्रण के लिए 1992 में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन यानी नाकों की स्थापना की गई। लेकिन बदकिस्मती यह रही कि ग्लोब महामारी होने के बाद भी भारत में नाको को सिर्फ एक परियोजना के रुप में चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय कार्यक्रम होने के बाद भी आती- जाती सरकारों ने इस पर गौर नहीँ किया।
भारत में यह देखा गया था कि यहाँ का सामाजिक ताना- वाना इतना मजबूत है कि एड्स का प्रसार तीव्रता से सम्भव नहीँ है। लेकिन यह केवल मिथक साबित हुआ।हालात यह है कि शहरों से स्थानांतरित होकर गाँव और कस्बों तक पहुँच एचआईवी पहुँच गया। दुनिया में एड्स संक्रमित व्यक्तियों में भारत का तीसरा स्थान है। एड्स एक ऐसी बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति को आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक रुप से नुकसान पहुँचाती है।
भारत ग्लोबल इंडेक्स में आज भी प्रमुख संक्रमित देशों में है। इसमें भी सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि किशोरों में यह बीमारी अधिक तेजी से फैल रहीं है। दुनिया में सबसे अधिक किशोर इसकी चपेट में हैं। इसकी मूल वजह उन्मुक्त जीवन शैली है। जिसकी वजह से एड्स का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। युवा उन्मुक्त जीवन शैली युवाओं को जीवन के प्रति बेपरवाह बना रहीं है। एचआईवी संक्रमित के लिए काम करने वाली एक संस्था से जुड़ी अनीता सिंह बताती हैं कि एड्स प्रोग्राम को लेकर सरकार गम्भीर है।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। यह इनके निजी विचार हैं।)
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