Charkhi Dadri News : अनाज मंडी में सरसों खरीद कछुआ गति से चली, मात्र छह सौ क्विंटल ही खरीद होने से किसानों में रोष

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Mustard purchase in the grain market went on at a snail's pace, farmers are angry as only six hundred quintals were purchased
अनाजमंडी में लगा सरसों का ढेश्र।
  • औने पौने दामों में छोटे व्यापारियों को सरसों को बेचने को मजबूर

(Charkhi Dadri News) बाढड़ा। जिले की मंडियों में एमएसपी दरों पर सरसों, गेहूं बेचना सरकार व खरीद एजेंसियों के गले की फांस बन गया है। कभी नमी, कभी हेंडलिंग एजेंट तो कभी झार लगाने के मामले को लेकर खरीद एजेंसियों द्वारा समय पर गेट पास या झार लगाने की शर्त के कारण खरीद कार्य केवल कछुआ गति से चल रहा है और आलम यह है कि पिछले सप्ताह शुरुआत के बाद से ही लगातार मात्र 600 क्विंटल की खरीद हो पाई है जिससे मंडियों में झंझट में पडऩे की बजाए पैसे जल्दी पाने के लिए किसानों में अब सरकारी खरीद की बजाए ग्रामीण क्षेत्र में फैले छोटे छोटे व्यापारियों को औने पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं।

पिछले सप्ताह शुरुआत के बाद से ही लगातार मात्र 600 क्विंटल की खरीद होने से 50 गांवों की खरीद कब करेंगे इसको लेकर संशय बना हुआ है

प्रदेश सरकार की मंडियों में निर्धारित तिथियों के बावजूद दो-दो सप्ताह के बाद भी खरीद कार्य रामभरोसे बनकर रह गया है और एमएसपी दरों पर सरसों, गेहूं खरीद होना अब मात्र केवल कागजी साबित होता नजर आ रहा है। जिले की दादरी व बाढड़ा, झोझूकलां में 15 मार्च से सरसों खरीद होनी चाहिए थी लेकिन आज 30 मार्च तक खरीद एजेंसियों व अन्नदाता तथा आढतियों के मध्य कभी नमी, कभी हेंडलिंग एजेंट तो कभी झार लगाने के मामले को लेकर खरीद एजेंसियों द्वारा समय पर गेट पास या झार लगाने की शर्त के कारण खरीद कार्य केवल कछुआ गति से चल रहा है और आलम यह है कि पिछले सप्ताह शुरुआत के बाद से ही लगातार मात्र 600 क्विंटल की खरीद होने से 50 गांवों की खरीद कब करेंगे इसको लेकर संशय बना हुआ है।

वहीं मंडियों में सुबह गेट पास से शुरु होते ही शाम तक केवल आपसी विवाद के मध्य ही समय गुजर रहा है। जो भी किसान एक बार मंडी में सरसों लेकर पहुंचता है तो सारा दिन का ड्रामा देखकर अब वह भी कन्नी काटने लगा है और खरीद एजेंसियों व आढतियों के मध्य बनी रस्साकसी व मंडियों के विवाद के झंझट में पडऩे की बजाए पैसे जल्दी पाने के लिए किसानों में अब सरकारी खरीद की बजाए ग्रामीण क्षेत्र में फैले छोटे छोटे व्यापारियों को औने पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं।

किसान मानबीर श्योराण, ओमप्रकाश, करतार सिंह, सुर्यप्रकाश, रामकिशन काकड़ौली इत्यादि ने बताया कि एक तरफ तो सरकार किसान की सरसों के एक एक दाने की एमएसपी भाव 5950 रुपये पर खरीद का दावा कर रही है जबकी धरातल पर किसानों की कोई सुध लेने वाला नहीं है जिससे मजबूरीवश उनको 5500 रुपये पर बेचने में ही अपनी भलाई समझ रहा है। कई किसानों ने बताया कि मार्केट कमेटी से लेकर खरीद एजेंसियां केवल दिखावटी किसान हितैषी होने का ढोंग रच रहे हैं लेकिन कृषक आज सबसे अधिक दो पाटों में पीसने को मजबूर है। इस बारे में आढती एसोसिएशन अध्यक्ष हनुमान शर्मा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि खरीद एजेंसियों व आढतियों की शर्तो के विवाद में खरीद कार्य में देरी हुई है लेकिन अब जल्दी से जल्दी खरीद व उठान करना ही प्राथमिकता है।

किसान का शोषण करने में कोई कमी नहीं

कांग्रेस के पूर्व विधायक सोमवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार गेहूं सरसों खरीद न करके केवल अन्नदाता को परेशान कर रही है। 15 मार्च से प्रदेश की मंडियों में सरसों व 25 मार्च से गेहूं का अनाज आना शुरु हो गया लेकिन मंडियों में जगह की कमी के साथ साथ खरीद व उठान न होने से मजबूरीवश किसानों को छोटे व्यापारियों को औने पौने दामों में बेचना पड़ रहा है। सरकार को किसानों की समस्या का तुरंत प्रभाव से समाधान करते हुए तुरंत जगह का चयन कर खरीद कार्य आरंभ कर किसानों को जल्द से जल्द भुगातन करवाना चाहिए।