Chaitra Navratri 7th Day, आज समाज डिजिटल डेस्क: नवरात्रि के सातवें दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा की जाती है। 30 मार्च से शुरू हुई नवरात्रि की पूजा का आज सातवां दिन है। विधिपूर्वक मां के कालरात्रि स्वरूप की पूजा करने से परेशानियों से छुटकारा मिलता है। यहां हम आपको पूजा की विधि बता रहे हैं। मां को कौन सा पुष्प, प्रसाद व अन्य क्या चीजें पसंद हैं वह भी हम इस आर्टिकल में आपको जानकारी दे रहे हैं। कथा और आरती भी बता रहे हैं।

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मौत से डरता है प्रत्येक व्यक्ति

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी दुर्गा का सातवां स्वरूप भक्तों को जीवन के सबसे बड़े सत्य यानि मृत्यु की सच्चाई का ज्ञान करवाता है। देवी की पूजा से मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। जीवन में प्रत्येक व्यक्ति मौत से डरता है, पर मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्त निडर और साहसी बनते हैं। देवी माता का यह स्वरूप सब तरह की नकारात्मक ऊर्जा, राक्षसों दानवों व भूतों का विनाश करता है।

ग्रहों के प्रभाव से पैदा हो जाती हैं मृत्यु संबंधी कई बाधाएं

व्यक्ति के जीवन में कई कई बार प्रतिकूल ग्रहों के प्रभाव के चलते मृत्यु संबंधी कई बाधाएं पैदा हो जाती हैं, जिसके कारण वह डर व चिंतित महसूस करता है। पर देवी कालरात्रि जल, अग्नि, पशु और शत्रु आदि के भय से भी भक्त को छुटकारा दिलाती हैं। भयानक रूप वाली मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा की जाए तो वह भक्तों को शुभ फल प्रदान करती हैं।

जानें मां का स्वरूप

देवी कालरात्रि के चार हाथ हैं।उनमें से उठा हुआ दाहिना हाथ वरमुद्रा में है। वहीं नीचे वाला दाहिना हाथ अभयमुद्रा में है। ऊपर वाले बाएं हाथ में तलवार व नीचे वाले बाएं हाथ में कांटा है। बाल घने अंधेरे जैसे गहरे काले हैं। लाल वस्त्र और बाघ की खाल पहने मां कालरात्रि तीन आंखों, बिखरे बालों व भयंकर स्वरूप के साथ दिखती हैं। उनका वाहन गधा है। गले में बिजली समान चमकती हुई श्वेत माला है। नाम से जाहिर है कि मां का रूप अत्यंत भयंकर और भयानक है।

पूजा विधि

नवरात्रि के सातवें दिन सुबह पहले स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें। फिर भगवान गणेश की पूजा करें। रोली, दीप, अक्षत व धूप अर्पित करें। मां कालरात्रि की का चित्र स्थापित करें। चित्र न हो तो पहले से स्थापित मां दुर्गा की तस्वीर की पूजा करें। मां को रात्रि रानी के फूल चढ़ाएं। प्रसाद के रूप में गुड़ चढ़ाएं। फिर आरती करें। साथ ही दुर्गा चालीसा व दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। मंत्रों का जाप भी करें।

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