Maa Kushmanda Pooja, आज समाज डिजिटल डेस्क: हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। 30 मार्च से चैत्र नवरात्रि का त्योहार चल रहा है और आज चौथा नवरात्रा है। चौथे दिन ब्रह्मांड की रचना करने वाली मां कुष्मांडा की पूजा का विधान है। यहां हम आपको देवी कुष्मांडा की पूजा विधि और लाभ के बारे में जानकारी दे रहे हैं। यह भी बता रहे हैं कि मां को कौन सा प्रसाद पसंद है। देवी कुष्मांडा का पूजा मंत्र क्या है।
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पूजा विधि और लाभ
नवरात्रि के चौथे दिन हरे रंग के वस्त्र पहनकर देवी कुष्मांडा की पूजा करनी चाहिए। इस दौरान मां को सौंफ या हरी इलायची, अथवा कुम्हड़ा चढ़ाएं। उम्र के बराबर हरी इलायची मां को अर्पित करें। प्रत्येक इलायची चढ़ाते समय ‘ॐ बुं बुधाय नम:’ कहें। सारी इलायची इकट्ठा करके हरे कपड़े में बांधकर रख लें। अगले नवरात्रि तक इन्हें असुरक्षित रखें।
देवी कुष्मांडा के पूजा मंत्र
- बीज मंत्र: कूष्मांडा: ऐं हरि देव्यै नम:
- ध्यान मंत्र: वंदे वैशिं कामार्थे चंद्रार्घकृत शेखरम्। सिंहारूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यस्वनिम्।
- पूजा मंत्र: ॐ कुष्मांदायै नम:
- या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
- ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।
देवी को यह प्रसाद है पसंद
मां कुष्मांडा को मालपुए का प्रसाद पसंद है। इसलिए देवी को आज मालपुए का भोग लगाएं। किसी गरीब अथवा ब्राह्मण को दान पुण्य करें। इससे निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। साथ ही बुद्धि का विकास भी होता है। देवी कुष्मांडा को पीले रंग की मिठाई या फल भी अर्पित कर सकते हैं।
108 बार करें मूल मंत्र का जाप
मां के मूल मंत्र ‘ॐ कुष्मांडा देव्यै नम:’ का 108 बार जाप करें। चाहें तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ भी करें। बुध को मजबूत करने के लिए भी मां कुष्मांडा की पूजा का विधान है। ज्योतिष के अनुसार अपनी हल्की हंसी से ब्रह्मांड की रचना करने के कारण इनका नाम कूष्माण्डा पड़ा। माता की 8 भुजाएं हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी के नाम से जाना जाता है। संस्कृत भाषा में मां कूष्मांडा को कुम्हड़ कहा जाता है। कुम्हड़ा उन्हें विशेष प्रिय है। ज्योतिष में इनका संबंध बुध ग्रह से है।
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