आप नेता ने बिल के विरोध में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
Wakf Amendment Bill (आज समाज), नई दिल्ली। वक्फ संशोधन बिल लोकसभा व राज्यसभा में पास हो चुका है लेकिन इसे लेकर अभी भी देश भर में दो तरह की राय देखने को मिल रही है। सबसे बड़ी बात है कि मुस्लिम समुदाय भी इस बिल को लेकर दो पक्षो में बंटा हुआ दिखाई दे रहा है। एक पक्ष उन लोगों का है जो भाजपा और एनडीए के हिमायती हैं वे सभी इस बिल के पास होने पर खुशी जता रहे हैं वहीं दूसरी तरफ वह पक्ष है तो कांग्रेस और विपक्ष से संबंध रखता है वह इस बिल का विरोध कर रहा है। इसी सब के बीच आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
मुसलमानों की धार्मिक स्वायत्ता को खत्म करेगा बिल
खान ने कहा कि यह विधेयक मुसलमानों की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वायत्तता को कम करता है। इतना ही नहीं मनमाने कार्यकारी हस्तक्षेप को सक्षम बनाता है। वहीं धार्मिक और धर्मार्थ कार्यों का प्रबंधन करने के अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कमजोर करता है।
कांग्रेस, एआईएमआईएम भी कर चुके हैं सुप्रीम कोर्ट का रुख
वक्फ संशोधन बिल के संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद कांग्रेस और एआईएमआईएम ने इसकी वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी-अपनी याचिकाओं में कहा है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक सांविधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है। जावेद ने आरोप लगाया है कि विधेयक वक्फ संपत्तियों और उनके प्रबंधन पर मनमाने प्रतिबंध लगाता है, जिससे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता कमजोर होती है। याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित कानून मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव करता है क्योंकि इसमें ऐसे प्रतिबंध लगाए गए हैं, जो अन्य धार्मिक बंदोबस्त में मौजूद नहीं हैं।
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