संपादकीय
सर्जिकल स्ट्राइक पर हाय-तौबा क्यों

 दुश्मन को उसी के घर में घुसकर मार गिराने के सेना के बेहद सफलतम अभियान के बाद भारतीय राजनीति में मानो भूचाल आ गया है। सेना के प्रति सम्मान और गर्व को दरकिनार कर राजनीतिक पैंतरेबाजी और श्रेय लेने की होड़ लगी है। देश की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी हुई सैनिक कार्रवाई को सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक लड़ाई बन जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस समूचे घटनाक्रम में हमारे संविधानवेत्ताओं की दूरदर्शिता पर पूरे भारत के नागरिकों को गर्व होना चाहिए कि उन्होंने तीनों सेनाओं का प्रमुख राष्ट्रपति को बनाया है जो कि एक गैर राजनीतिक पद है। जाहिर है वे सेना को राजनीति से अलग रखना चाहते थे। वर्तमान रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर अपने पूर्ववर्ती रक्षामंत्रियों से बेहद आगे निकलकर आक्रामक अंदाज में लगातार पाकिस्तान को यह चेतावनी दे रहे हैं कि फिर आतंकवादी हमला हुआ तो ऐसे ही घर में घुसकर मारेंगें।

दुनिया में भारत को एक बेहद जिम्मेदार राष्ट्र माना जाता है और हमारी नीतियां भी एक जिम्मेदार राष्ट्र की ही रही है। सर्जिकल स्ट्राइक सेना की एक शानदार कार्रवाई थी लेकिन रक्षामंत्री के ऐसे बयान भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को प्रभावित कर सकते हैं। हमारे रक्षामंत्री को यह भी याद रखना चाहिए कि पाक प्रायोजित आतंकवाद भारत के भीतर भी गहरी पैठ जमा चुका है और उसकी सर्जरी के लिए वृहद् रणनीति की आवश्यकता है। दूसरी ओर भारत में सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर विरोधाभास पैदा करने का प्रयास किया गया है एवं राजनीतिक क्षेत्र में सेना को घसीटा जा रहा है। पाकिस्तान में केजरीवाल के इस बयान को प्रमुखता दी गई है जिसमें उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत पेश करने की भारत सरकार से मांग की थी। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में स्वतंत्रताएं तो अनगिनत हैं लेकिन देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने के किसी भी प्रकार के प्रयास की भर्त्सना की जानी चाहिए।

उरी हमले में 19 भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद गुस्से से जब समूचा राष्ट्र उबल रहा था, तब प्रधानमंत्री के लिए भी चुनौती कम नहीं थी। वे वाॅर रूम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और तीनों सेनाओं के अध्यक्ष के साथ जवाब देने के तौर तरीके तलाश रहे थे। इन तरीकों में सर्जिकल स्ट्राइक, मिसाइल या हवाई हमले सहित कई विकल्पों पर विचार हुआ। अंततः पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए प्रधानमंत्री ने सर्जिकल हमले की मंजूरी दे दी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने केरल की धरती से पाकिस्तानी जनता के लिए मोहब्बत का पैगाम भी दिया और युद्ध जैसे हालात में सर्वदलीय बैठक बुलाकर दुनिया को यह बताने की कोशिश की कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्र भारत में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सब एक हैं। इसके बाद पाकिस्तान में नियंत्रण रेखा के पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया। पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और छद्म युद्ध से भारत कई दशकों से जूझ रहा है और भारतीय सुरक्षा का थिंक टैंक इन चुनौतियों से निपटने की योजनाएं तो कई सालों से बना रहा है लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए कड़ा संदेश देने का साहस दिखाया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने। 

किसी भी सीमित क्षेत्र में सेना जब दुश्मनों और आतंकियों को नुकसान पहुंचाने और उन्हें मार गिराने के लिए सैन्य कार्रवाई करती है तो उसे सर्जिकल स्ट्राइक कहते हैं। शरीर में जब किसी बीमार कोशिका को हटाना होता है तो डाॅक्टर बेहद बारीकी एवं संजीदगी से उस कोशिका को हटा देते हैं तथा इसमें वे इस बात की सावधानी भी रखते हैं कि अन्य कोशिकाओं से न तो कोई छेड़छाड़ हो, न ही वे किसी भी प्रकार से प्रभावित हो। बहरहाल भारतीय सेना ने जिस शानदार अंदाज में इस अभियान को अंजाम दिया वह तारीफ-ए-काबिल है।

भारतीय सेना ने पाक प्रशासित कश्मीर में तीन किलोमीटर अंदर घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया। इस स्ट्राइक का टारगेट आतंकी कैंप थे और तकरीबन सात आतंकी कैंप तबाह कर दिए गए। इस आॅपरेशन की ख़ास बात यह रही कि भारतीय किसी कमांडो को खरोंच तक नहीं आई। यह इलाका दुनिया के ख़तरनाक और दुर्गम इलाकों में शुमार किया जाता है। जहां दुनिया के दुर्दांत आतंकवादी बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। ऐसे में भारतीय सेना ने बेहद पुख्ता जानकारी जुटाकर बड़े गोपनीय तरीके से इस आॅपरेशन को अंजाम दिया और कई आतंकी मार गिराए। इस पूरे आॅपरेशन को राष्ट्रीय तकनीकी शोध संस्थान के द्वारा निगरानी में रखा गया था और इस कार्रवाई में शामिल सैनिकों के हेलमेट पर लगे उच्च दर्जे के कैमरे सीधे सैटेलाइट से जुड़े थे और पूरी कार्रवाई का सीधा प्रसारण इस अभियान से जुड़े उच्च अधिकारी दिल्ली में देख रहे थे। इससे प्रतीत होता है कि हमारी फौज ने एक बेहद रणनीतिक और महत्वकांक्षी अभियान को साहसिक तरीके से संपन्न किया।

वास्तव में भारतीय सेना के इस सफल अभियान ने सर्जिकल स्ट्राइक करने वाले अग्रणी राष्ट्रों में भारत को शामिल कर दिया है। पूरी दुनिया में इजराइल की सेना को सर्जिकल स्ट्राइक में सबसे माहिर माना जाता है। इजराइल की कुख्यात गुप्तचर ऐजेंसी मोसाद, आंतरिक सुरक्षा के लिए शिंग बैंक, मिलिट्री इंटेलिजेंस अमन, इजराईल स्पेशल सेल जैसी गुप्तचर और सैन्य इकाईयां बेहद मुस्तैदी से काम करती है एवं इनमें श्रेय नहीं काम को लक्ष्य रखा जाता है। 1976 में युगाण्डा में पीएलओ के आतंकवादियों द्वारा एयर फ्रांस के एक विमान को अपहरण कर अनेक इजराइलियों को बंदी बना लिया गया था, जिसके जवाब में इजराइल ने बेहद शानदार अभियान के जरिए अपने बंधकों को छुड़ाकर सारे आतंकवादी मार गिराए थे। इस अभियान में इजराइल का एक कमांडो मारा गया था और चार अन्य कमांडो घायल हुए थे।

इस सफलतम अभियान को आॅपरेशन थंडर बोल्ट के नाम से आज भी दुनिया में याद किया जाता है। सर्जिकल स्ट्राइक का दूसरा सफलतम अभियान अमेरिकी सेना ने अंजाम दिया था जब उन्होंने बेहद गोपनीय तरीके से पाकिस्तान के इस्लामाबाद से करीब 61 किमी दूर ऐबटाबाद में एक इमारत में घुसकर दुनिया केे सबसे खतरनाक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। अमेरिका द्वारा पाकिस्तान में इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही भारत में यह कहा जाने लगा था कि भारतीय सेना को पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादियों को मार गिराना चाहिए।अपनी पूर्ववर्ती सरकारों को पीछे छोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साहसिक फैसला किया और सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए दुश्मन देश में घुसकर भारतीय सेना ने एक कामयाब अभियान चलाया तो उस पर देश में राजनीतिक बयानबाजियां बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

भारतीय सेना ने जिस इलाके में सर्जिकल स्ट्राइक की है वह सुरक्षा के लिहाज से दुनिया का बहुत ही खतरनाक इलाका है।रूस के दक्षिणी भाग ताजिकिस्तान में पामीर के गाठ का फैलाव है। यहीं अफगानिस्तान, भारत, पाकिस्तान एवं चीन की सीमाएं मिलती हैं। सोवियत संघ के विघटन के बाद से ही मध्य एशिया में उत्तरी काकेशस के क्षेत्र में इस्लामी आतंकवादियों ने पैर जमाना आरंभ कर दिया था। पूरे उत्तरी काकेशस क्षेत्र को स्वतंत्र इस्लामी राज्य में रूपांतरित करना उनका घोषित लक्ष्य था। उनकी छत्रछाया में अपराधियों एवं मादक पदार्थों के अवैध व्यापार में लगे व्यक्तियों को फलने फूलने का पूरा मौका प्राप्त हो रहा था। चेचेन्या में उन्होंने अपना केंद्र स्थापित कर लिया था तथा दागस्तान को अपनी कार्यवाही के निशाने पर रखा था। स्वतंत्र देशों के राष्ट्रकूल कहे जाने वाले इस इलाके में इस्लामिक चरमपंथियों का गहरा प्रभाव है और अफगानिस्तान का इलाका इनके लिए प्रमुख शरणस्थली बन गया है। इन चरमपंथियों का प्रभाव भारत के कश्मीर और चीन के जिन जियांग प्रांत तक देखा जाता है। इस प्रकार जिस इलाके में भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की है वह इलाका पूरी दुनिया में चरमपंथियों और इस्लामिक आतंकवाद को आयातित करता है। दुनिया में जब कहीं भी आतंकवादी हमले होते हैं उसके तार इसी इलाके से जुड़े होते हैं। ऐसे में भारतीय सेना की दिलेरी की दाद दी जानी चाहिए और उस पर कोई भी संदेह करना हमारी सामरिक ताकत को नजरअंदाज करने जैसा है।

सर्जिकल स्ट्राइक की योजनाएं और फुटेज बेहद गोपनीय होते हैं। यह किसी खास टारगेट को खत्म करने के लिए किए जाते हैं अतः इसकी योजना या रणनीति का खुलासा करना राष्ट्र की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। अतः इस समय हमें सेना के साथ खड़े रहना चाहिए क्योंकि हम तभी तक सुरक्षित हैं जब तक हमारी सरहदें सुरक्षित हैं। कूटनीतिक क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहतरीन प्रयास किए और उसी का नतीजा है कि दूसरे देश में जाकर सैन्य अभियान करने के वाबजूद दुनियाभर में भारत के कार्यों को सराहा गया एवं फ्रांस, रूस, जर्मनी जैसे राष्ट्रों ने आतंकवाद के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को न्यायोचित ठहराया। यहां तक की हमारे घोर विरोधी एवं शत्रु राष्ट्र चीन के द्वारा भी सर्जिकल स्ट्राइक के विरोध में कोई बयान नहीं आया। स्पष्ट है सुरक्षा को लेकर आक्रमण की इस नीति पर सरकार को लगातार काम करना चाहिए, इस नीति पर पूर्ववर्ती सरकारें काम करती तो भारत की सीमाएं इतनी असुरक्षित नहीं होती और पाक प्रायोजित आतंकवाद भी अपनी पैठ नहीं जमा पाता। भारत के राजनीतिक दलों को यह बात अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि देश के लोग राजनीतिज्ञों की अपेक्षा सेना पर ज्यादा भरोसा करते हैं। अतः सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत देने की मांग पूरी तरीके से खारिज की जानी चाहिए।

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