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घरवालों ने करवाया था बाल विवाह, ससुराल वाले लेने आए तो लड़की ने किया मना
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मंदसौर(इंदौर).

माता-पिता व बुआ की जिद के आगे बेबस बालिका ने विवाह तो किया लेकिन समझ आने पर उसने इसके खिलाफ न्यायालय में आवाज उठाई। परिजन ने आवाज दबाने की पूरी कोशिश की। माता-पिता ने घर से निकाल तक दिया। बावजूद हिम्मत नहीं हारी और बाल विवाह को शून्य करा ही लिया।
हम बात कर रहे हैं जनकूपुरा निवासी नेहा कछावा 17 की। वर्तमान में कक्षा 11वीं में कला संकाय की पढ़ाई कर रही है। 10 मई 2011 को निंबाहेड़ा निवासी महेंद्र पिता गोवर्धनलाल बंजारा से माता-पिता व बुआ ने विवाह करा दिया था। उस समय नेहा सातवीं में पढ़ रही थी। उसे पता ही नहीं था कि परिजन विवाह कराकर अपराध कर रहे हैं।
जब लाडाे अभियान के तहत महिला सशक्तिकरण विभाग अधिकारियों ने स्कूल में छात्राओं को बाल विवाह की जानकारी दी तब उसे पता चला। 2015 को ससुराल वाले उसे लेने पहुंचे तो नेहा ने विरोध कर दिया। पुलिस व विभागीय अधिकारियों को सूचना दी। इससे नाराज होकर माता-पिता ने उसे घर से निकाल दिया। 15 सितंबर को कुटुम्ब न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया। 4 नवंबर को दोनों पक्षों की सहमति से न्यायालय ने बाल विवाह काे शून्य घोषित किया।

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