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बुंदेलखंड में सूखे से हाहाकार, एक दशक में 62 लाख लोग कर चुके हैं पलायन
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झांसी।

मौसम की मार की वजह से बुंदेलखंड के हालात बदतर होते जा रहे हैं। रोजगार की कमी और सूखे के कारण आत्महत्याओं के साथ ही बड़ी संख्या में किसान यहां से पलायन कर रहे हैं। एक संस्था की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, एक दशक में करीब 62 लाख लोग बुंदेलखंड छोड़ कर जा चुके हैं। काम की तलाश में किसान दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मजदूरी के लिए पलायन कर रहे हैं।
ये आंकड़ें उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में बंटे बुंदेलखंड के 13 जिलों के हैं। हाल ही में प्रवास नाम की संस्था ने सर्वे पूरा करने के बाद ये आंकड़ें जारी किए हैं। पल्स पोलियो अभियान के दौरान एकत्रित हुए आंकड़ों और गायब हुए परिवारों की स्थिति को भी संस्था ने आधार बनाया है। ये हालात तब है, जब यूपीए सरकार बुंदेलखंड में रोजगार, विकास और गांवों की दशा सुधारने के लिए साढ़े सात हजार करोड़ रुपए का पैकेज भी दे चुकी है। हालांकि, कभी भी सरकार द्वारा पलायन का आधिकारिक तौर पर सर्वे नहीं कराया गया है। सर्वे करने वाली संस्था किसानों के आत्महत्या और बुंदेलखंड के विशेष पैकेज पर निगरानी रखती है। प्रवास संस्था के प्रमुख और एक्टिविस्ट आशीष सागर का कहना है कि बुंदेलखंड अब महाराष्ट्र के विदर्भ की तरह पहचान बना रहा है। काफी संख्या में लोग अपनी पैतृक जमीन और गांवों को अलविदा कह रहे हैं। बुंदेलखंड का शायद ही कोई ऐसा गांव हो, जहां घरों में ताला न लटका हो।

आशीष सागर ने बताया कि उन्होंने पल्स पोलियो अभियान से मिले आंकड़ों की भी मदद ली है। पोलियो टीम डोर-टू-डोर जाती है। इन टीमों को बड़ी संख्या में घरों में लोग नहीं मिले। इसके अलावा उन्होंने बुंदेलखंड पैकेज के लिए बनी ग्राम समिति की कुछ रिपोर्ट्स को सर्वे में शामिल किया है। साथ ही दो साल पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल की आंतरिक समिति ने प्रधानमंत्री ऑफिस (पीएमओ) को बुंदेलखंड के हालात पर एक रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में बेरोजगारी और पलायन से संबंधी आंकड़ें दिए गए थे। इसके कुछ आंकड़ों की भी सहायता ली गई। अब प्रवास संस्था के किए गए इस सर्वे रिपोर्ट को वह सरकार को भेजेंगे।

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