मनोरंजन
संघर्षों से जूझते एक सितारे की अनकही कहानी 'बुधिया सिंह: बोर्न टू रन'
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 मुंबई। महज पांच साल की उम्र में 70 कि.मी. की मैराथन को पूरा करने की चुनौती को पूरा करने निकले बुधिया सिंह का नाम आज शायद बहुत कम लोगों को याद होगा। हालांकि ये घटना महज 10 साल पुरानी है, जब बुधिया और उसके कोच बिरांची दास को लेकर तरह तरह के विवाद सामने आए थे। उसी बुधिया की कहानी को इस फिल्म में दिखाया गया है, कि असल में बुधिया और बिरांची के साथ हुआ क्या था। बिरांची (मनोज बाजपेयी) को जब पता चलता है कि बुधिया (मयूर यादव) में लगातार दौड़ने की अद्धुत क्षमता है। शुरुआत में 20, 30 और 40 किमीं की मैराथन दौड़ने के बाद बुधिया का पूरे भारत में नाम हो जाता है। लेकिन इसके साथ कुछ विवाद भी सामने आने लगता है।

बिरांची पर आरोप लगता है कि वो एक पांच साल के बच्चे का शोषण कर रहा है। ये बात सच है कि बिरांची, बुधिया को दौड़ने के दौरान पानी तक पीने नहीं देता, जिसके उसके अपने तर्क हैं। ओडिशा राज्य के एक चाइल्ड वेल्फेयर के हस्तक्षेप के बाद मामला और बिगड़ने लगता है और बिरांची की हर बात विवाद का रूप लेने लगती है। वो बुधिया का कैलिबर (मानसिक शक्ति) दुनिया के सामने रखने के लिए एक 70 किमी की मैराथन, पुरी से जगन्नाथ के बीच रखता है। उसे बुधिया का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना है। लेकिन मैराथन पूरी करने से पहले बुधिया बेहोश हो जाता है। बिरांची उसको पानी तक नहीं देता। मामला बिगड़ जाता है और बिरांची को पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। ये फिल्म बुधिया से ज्यादा बिरांची पर फोकस दिखती है। इसमें कोई शक नहीं है कि मनोज बाजपेयी को बस रोल समझ आना चाहिए, वो इसमें जान लगा देते हैं। लेकिन ये फिल्म केवल मनोज की एक्टिंग की वजह से ही आकर्षित नहीं करती। इसकी डायरेक्शन भी आपको बांधे रखती है। बुधिया की मूल कहानी पता होने के बावजूद फिल्म में एक रहस्य सा बना रहता है, जो उसको और खास बना देता है।
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