राज्यों से
राजेश त्रिपाठी ने डा. अय्यूब के टिप्पणी पर निंदा प्रकट की
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  गोरखपुर: बसपा का साथ छोड़ बहन मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाने वाले उ.प्र के पूर्व राज्यमंत्री और वर्तमान गोरखपुर जिले के चिल्लूपार से विधायक राजेश त्रिपाठी ने भी अपने निकट और सहयोगी मित्र पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. अय्यूब कि गोरखपुर के सांसद व हिन्दूवादी नेता योगी आदित्यनाथ पार कि गयी अपशब्द टिप्पणी कि कड़े शब्दों में निन्दा की है। राजेश त्रिपाठी डा. अय्यूब के बेहद ही करीबी बताये जाते हैं , ऐसा माना जाता है कि 2007 विधानसभा चुनाव में राजेश त्रिपाठी को चुनावी मैदान में उतारने में डा. अय्यूब ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन श्री त्रिपाठी अब बहुजन समाजवादी पार्टी को अलविदा कह चुके हैं , क्योंकि उनकी चिल्लूपार विधानसभा सीट को उनके द्वारा ही हराये गये पूर्वांचल के माफिया व पूर्व उ.प्र कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी को वहाँ से बसपा का प्रत्याशी बनाया गया है।

हाल ही में गोरखपुर कि एक रैली को सम्बोधित करते हुये पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. मो. अय्यूब ने योगी आदित्यनाथ की तुलना आतंकवादी से की थी , जिसके चलते हिन्दू संगठनो में काफी आक्रोश फैल और गोरखपुर में जगह जगह अय्यूब का पुतला फूंक माफी मांगने और उनको गिरफ्तार करने की मांग उठी। इसी क्रम में आज राजेश त्रिपाठी ने अपने फेसबुक व सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी सम्वेदना प्रकट कर इसकी निन्दा की। राजेश त्रिपाठी ने पत्र के माध्यम से लिखा कि-

...... गोरक्षपीठाधीश्वर पर बहुत ही आपत्तिजनक टिप्पणी की है आपने डाक्टर अय्यूब साहब !... जिसकी कड़े शब्दों में हम निन्दा और भर्त्सना करते हैं... ! 
......आश्चर्य हुआ कि कोई आई.ए.एस. एलायड और साथ में मास्टर आफ सर्जन तथा अपने को सभ्य मानने वाला व्यक्ति इस तरह की अमर्यादित और असभ्य टिप्पणी कैसे कर सकता है...? वह भी तब जब दुनिया का हर शख्स आतंकवाद और आतंकवादी की परिभाषा जान-समझ चुका हो...! 
....कौन नहीं जानता कि गोरक्षपीठ करोड़ों हिन्दू समुदाय के आस्था के केंद्र बिंदु ही नहीं अपितु उसके पीठाधीश्वर पूर्वान्चल में विकास की नयी और स्थायी ईबारत लिखने वाले प्रमुख विकास स्तम्भ हो चुके हैं ! 
....स्मरण करिये जब एक दशक पूर्व कुछ सिरफिरों ने जिन्हें किसी भी नाम वाले पर आरोप लगाकर सुर्खियों में रहने की बीमारी है,... उन्होंने आप पर पड़ौसी देश के नापाक संगठन से जुड़े होने का आरोप लगाया था और आप बौखला गये थे... तब भी हमारे जैसे लोगों ने उन सिरफिरों की मुखालफत की थी.... और आज हम आपकी कर रहे हैं... 
....आप जानते हैं कि पैसे की हवस और अपने निकटस्थ बड़े लोगों के दबाव में बसपा मुखिया "बहन जी" ने हमारे साथ अन्याय किया....और हमारी जगह लोभ में उस सोच वाले परिवार को तवज्जो दी जिस सोच के खिलाफ ही बसपा का जन्म हुआ था. ... जिसके चलते हमें बसपा से विदा लेने का मन बनाना पड़ा... बावज़ूद इसके हम कह सकते हैं कि दयाशंकर सिंह जी ने जिन आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल उनके लिए किया वह घोर निन्दनीय है.... मगर उससे भी शर्मनाक और घोर आपत्तिजनक वे शब्द रहे जो बहन जी देश की पार्लियामेंट में रखते समय या लखनऊ में बसपा के राष्ट्रीय महासचिव, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व सभापति, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्रियों जैसे जिम्मेदार लोगों की मौजूदगी में दयाशंकर सिंह की माँ, पत्नी, बहन, बेटी के लिए प्रयोग किए गए.... 
....नतमस्तक हूँ बहन स्वाती सिंह के अदम्य साहस और शब्दों के चयन की परिपक्वता के समक्ष....! 
....इससे यह भी सिद्ध होता है कि अधिक पढ़ा लिखा होने, जिम्मेदार पदों पर बैठ जाने या अपने को बहुत सामाजिक घोषित कर देना महत्वपूर्ण नहीं है.... महत्वपूर्ण यह है कि उसके पास शब्दों के चयन और प्रस्तुति की काबिलियत कितनी है....? अगर यह काबिलियत है तो सामान्य गृहिणी भी अपने शब्दों के चयन और समय पर साहस दिखा कर नेशनल हीरो हो सकती है... और कोई गलत शब्दों के चयन से विलेन....! 
.....जिम्मेदार लोगों के गलत और आपत्तिजनक शब्दों से देश का प्राय: हर नागरिक शर्मिंदा है....

जाहिर है कि राजेश त्रिपाठी बसपा से टिकट कट जाने के बाद से ही भाजपा और योगी के निकट देखे जा रहें हैं, भाजपा से निष्कासित नेता दयाशंकर सिंह का मायावती पर कि गयी टिप्पणी कि राजनीति अभी समाप्त ही नहीं हुयी थी कि डा. अय्यूब ने योगी आदित्यनाथ पर विवादित टिप्पणी कर पूर्वांचल की राजनीति को और गर्म कर दिया, अब तो ऐसा प्रतित होता है कि सुर्ख़ियों में बने रहने के लिये नेताओं के पास विवादित टिप्पणी के अलावा कूछ बचा ही नहीं है।

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