राज्यों से
लालबाग पैलेस भी पानी के रिसाव के कारण जर्जर हाल में
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इंदौर। 

रखरखाव के अभाव में राजबाड़ा जैसे ही दूसरी होलकरकालीन धरोहरें भी हादसे के मुहाने पर हैं। होलकरकालीन राजाओं की शान का प्रतीक रहा लालबाग पैलेस भी पानी के रिसाव के कारण जर्जर हाल में तब्दील होते जा रहा है। राजबाड़ा का एक हिस्सा गिरने के बाद लालबाग का बदहाल हो चुका हिस्सा भी बंद कर दिया गया है।लालबाग पैलेस की छत पर बारिश के पानी की निकासी के लिए जो पाइप होलकरकालीन दौर में लगाए गए थे, वे सभी चोक हो चुके हैं। इस कारण छत पर पानी भरा रहता है, जो दीवारों में भी रिस रहा है। इससे दीवारें कमजोर हो रही हैं। पैलेस के प्रवेश पर स्थित पोर्च की सीलिंग का क्षरण हो रहा है, जिससे नक्काशी उखड़ रही है। दरबार हॉल, डांसिंग हॉल की सीलिंग का प्लास्टर उखड़ गया है।

बेंक्वेट और डांसिंग हॉल के बीच स्थित लॉबी ढहने के कगार पर पहुंच गई है।कलाप्रिय होलकर राजाओं द्वारा बनाई आर्ट गैलरी पर पानी के रिसाव के दाग-धब्बे उभर आए हैं। इसके पास स्थित कमरे की सीलिंग किसी भी दिन भरभराकर गिर जाएगी। सुरक्षा की दृष्टि से इस कमरे को बंद कर दिया गया है। साथ ही महाराजा के बैठक हॉल, उनके बेडरूम में रिसाव हो रहा है। महारानी के बेडरूम और ड्रेसिंग रूम की सीलिंग का प्लास्टर उखड़कर गिर रहा है। तारामंडल की छत तो सबसे खराब स्थिति में है। यहां की लकड़ी पूरी तरह सड़ चुकी हैं। इस कारण छत में जगह-जगह छेद हो रहे हैं। दक्षिणी पोर्च की सीलिंग का प्लास्टर गिर रहा है। खंभे खराब हो चुके हैं। यही स्थिति पूर्वी पोर्च (नवगृह उद्यान) की भी है।

होलकरकालीन स्थापत्य की इस अनूठी इमारत को निहारने के लिए रोज 200 से ज्यादा पर्यटक आते हैं, लेकिन पुरातत्व विभाग इसके रखरखाव के प्रति गंभीर नहीं है। इसी का परिणाम है कि 1988 में लालबाग के अधिग्रहण के बाद आगे के हिस्से की पहली और दूसरी मंजिल अब तक खोली नहीं जा सकी। इन मंजिलों की छतें टूट चुकी हैं जबकि 2004 में लगी आग के बाद इसी हिस्से की दीवारें और छत कमजोर हो गई हैं। इनके सुधार या पुनर्निर्माण की कोई पहल नहीं की गई है। 2005 की बाढ़ से प्रभावित हुआ तलघर में मौजूद रसोईघर और अन्य हिस्सा बिगड़े हाल में ही है।

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