राज्यों से
हारे प्रत्याशी को खुली जीप में घुमाया साढ़े 11 लाख रुपए का चंदा दिया
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रतिया/भूना |

इस बार पंचायत चुनाव में गजब का भाईचारा दिख रहा है। पहले सर्वसम्मति में 15 साल का रिकॉर्ड टूटा और 54.4 फीसदी पदों पर निर्विरोध चयन हुआ। अब हारे हुए प्रत्याशियों को जख्मों पर ग्रामीण मिलकर ‘मरहम’ लगा रहे हैं। गांव हसंगा में सरपंच पद के चुनाव में हारे सज्जन सिहाग को ग्रामीणों ने न सिर्फ चंदा जुटाकर 11.70 लाख रुपए दिए, बल्कि खुली जीप में बैठा सारे गांव में भी घुमाया। इससे पहले रोहतक व पानीपत के तीन गांवों में भी ऐसा हुआ।

गांव हसंगा में पूर्व सरपंच मुखा देवी के बेटे सज्जन सिहाग, सुरेंद्र लांबा और धर्मबीर खलेरी में तिकोना मुकाबला था। 24 जनवरी को नतीजे घोषित हुए। सुरेंद्र लांबा को 1,152 तो सज्जन सिहाग को 1009 वोट मिले। पिछले प्लान में सज्जन की मां मुखा देवी सरपंच बनीं थी। करीब तीन साल पहले करंट लग जाने से उनकी मौत हो गई तो उप चुनाव में धर्मबीर खिलेरी सरपंच बने।
स्वर्गीय इंस्पेक्टर रणधीर सिंह सिहाग के परिवार, कुरड़ा राम के परिवार, बगड़ावत, कूना राम, कुलदीप मूंड, सूबे सिंह, महाबीर मूंड व कालू राम के परिवारों ने तो हारे प्रत्याशी के आर्थिक मदद जुटाई ही, धानक बस्ती व बाजीगर बस्ती के लोगों ने भी चंदा जुटाया। सज्जन सिहाग ने कहा कि गांव के लोगों ने प्यार व सहयोग देकर उसका मनोबल बढ़ा दिया है।
 

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